Target Judiciary: Discussion

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Thursday, 21 March 2019

31.03.2019: हरियाणा में HCS और राजस्थान में न्यायिक परीक्षा के ही दिन

March 21, 2019 0
31.03.2019: हरियाणा में HCS और राजस्थान में न्यायिक परीक्षा के ही दिन

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    मिलिए राजस्थान के पहले नेत्रहीन जज से

    February 07, 2019 0
    मिलिए राजस्थान के पहले नेत्रहीन जज से

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    केरल हाईकोर्ट : खाते से गलत तरीके से पैसे निकाला तो बैंक जिम्मेवार

    February 07, 2019 0
    केरल हाईकोर्ट : खाते से गलत तरीके से पैसे निकाला तो बैंक जिम्मेवार

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    Thursday, 31 January 2019

    Punjab and Haryana High Court: जज की नियुक्ति में वरिष्ठता की अनदेखी

    January 31, 2019 0
    Punjab and Haryana High Court: जज की नियुक्ति में वरिष्ठता की अनदेखी

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    हाई कोर्ट के हर जज के पास लगभग 4500 मामले लंबित

    January 28, 2019 0
    हाई कोर्ट के हर जज के पास लगभग 4500 मामले लंबित

    Saturday, 19 January 2019

    Top 26 Important Section in IPC | जानिए IPC में धाराओ का मतलब

    January 19, 2019 0
    Top 26 Important Section in IPC | जानिए IPC में धाराओ का मतलब

    Top 26 Important Section in IPC 

     जानिए IPC में धाराओ का मतलब
    जानिए IPC में धाराओ का मतलब
    जानिए IPC में धाराओ का मतलब



    धारा 307 = हत्या की कोशिश
    धारा 302 = हत्या का दंड
    धारा 376 = बलात्कार
    धारा 395 = डकैती
    धारा 377 = अप्राकृतिक कृत्य
    धारा 396 = डकैती के दौरान हत्या
    धारा 120 = षडयंत्र रचना
    धारा 365 = अपहरण
    धारा 201 = सबूत मिटाना
    धारा 34 = सामान आशय
    धारा 412 = छीनाझपटी
    धारा 378 = चोरी
    धारा 141 = विधिविरुद्ध जमाव
    धारा 191 = मिथ्यासाक्ष्य देना
    धारा 300 = हत्या करना
    धारा 309 = आत्महत्या की कोशिश
    धारा 310 = ठगी करना
    धारा 312 = गर्भपात करना
    धारा 351 = हमला करना
    धारा 354 = स्त्री लज्जाभंग
    धारा 362 = अपहरण
    धारा 415 = छल करना
    धारा 445 = गृहभेदंन
    धारा 494 = पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह0
    धारा 499 = मानहानि
    धारा 511 = आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।


    हमारेे देश में कानूनन कुछ ऐसी हकीक़तें है, जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं होने के कारण हम अपने अधिकार से मेहरूम रह जाते है।

    तो चलिए ऐसे ही कुछ
    पांच रोचक फैक्ट्स की जानकारी आपको देते है,
    जो जीवन में कभी भी उपयोगी हो सकती है.

    (1) शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती-

    कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो. अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है. इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है.

    (2.) सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रूपये तक का बीमा कवर क्लेम कर सकते है-


    पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते है. आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रूपये तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है. अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है. दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है.

    (3) कोई भी हॉटेल चाहे वो 5 स्टार ही क्यों ना हो… आप फ्री में पानी पी सकते है और वाश रूम इस्तमाल कर सकते है-


    इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी हॉटेल में जाकर पानी मांगकर पी सकते है और उस हॉटल का वाश रूम भी इस्तमाल कर सकते है. हॉटेल छोटा हो या 5 स्टार, वो आपको रोक नही सकते. अगर हॉटेल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई कर सकते है. आपकी शिकायत से उस हॉटेल का लायसेंस रद्द हो सकता है.

    (4) गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता-



    मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता. मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है. इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है.

    (5) पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता


    आईपीसी के सेक्शन 166ए के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी आपकी कोई भी शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता. अगर वो ऐसा करता है तो उसके खिलाफ वरिष्ठ पुलिस दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. अगर वो पुलिस अफसर दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम (6)महीने से लेकर 1 साल तक की जेल हो सकती है या फिर उसे अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती है.

    इन रोचक फैक्ट्स को हमने आपके लिए ढूंढ निकाला है.


    ये वो रोचक फैक्ट्स है, जो हमारे देश के कानून के अंतर्गत आते तो है पर हम इनसे अंजान है. हमारी कोशिश होगी कि हम आगे भी ऐसी बहोत सी रोचक बाते आपके समक्ष रखे, जो आपके जीवन में उपयोगी हो।

    इस मैसेज को आगे भी भेजना और अपने पास सहेज कर रखना, आपके कभी भी ये अधिकार काम आ सकते हैं।

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    January 19, 2019 0
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    Monday, 14 January 2019

    कौन बनते है आईएएस और आईपीएस | क्या दिल्ली जाना जरुरी है?

    January 14, 2019 0
    कौन बनते है आईएएस और आईपीएस | क्या दिल्ली जाना जरुरी है?

    कौन बनते है आईएएस और आईपीएस 

    कौन बनते है आईएएस और आईपीएस | क्या दिल्ली जाना जरुरी है?
    कौन बनते है आईएएस और आईपीएस | क्या दिल्ली जाना जरुरी है?

    यूपीएससी से IAS या IPS इंसान ही बनते हैं. कई सवाल जो हम अप्रेन्टिस को असमंजस में डालते आये है, कई नये अप्रेन्टिस दोस्तों ने ब्लॉग पर पूछा कि आईएएस बनने के लिए इंसान के अन्दर क्या होना चाहिए, क्या IAS सिर्फ अच्छे पढ़ने वाले, मेधावी विद्यार्थी ही बन सकते हैं जिनका पास्ट अकेडमिक रिकॉर्ड अच्छा रहा हो?

    ऐसा बिल्कुल नहीं है. आप भी आईएएस बन सकते हैं. यह बिल्कुल मैटर नहीं करता कि आपने 10वीं या 12वीं में क्या स्कोर किया है….भले आपने ग्रेजुएशन थर्ड डिवीज़न से पास की हो….पास्ट पास्ट होता है. पास्ट को भूलकर आपको आगे देखना चाहिए. यदि आप पास्ट की गलतियों को देखकर अपने आज को ख़राब कर रहे हैं तो आपको अपने भविष्य में अन्धकार ही अन्धकार मिलेगा. इसलिए अच्छा है कि पीछे मुड़ कर कभी न देखें !

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    पढ़ाई के दौरान एकाग्रचित कैसे हों? क्या आपने अपने शहर में घोड़ा को चलते देखा है? 


    घोड़े के दोनों आँखों के बगल में चमड़े की पट्टी लगा दी जाती है. ऐसा इसीलिए क्योंकि वह सीधा देख पाए. चलते वक़्त उसके बगल में होने वाली सड़क की गतिविधियों पर उसका ध्यान न जा पाए और वह सिर्फ सीधा देख कर अपने लक्ष्य की ओर चले. ऐसा विद्यार्थी जीवन में होना चाहिए. आप अपने अगल-बगल की गतिविधियों पर ध्यान मत दें. कौन आपके बारे में क्या कह रहा है, आपके बारे में क्या विचार रखता है, आपके फूफा आपका मजाक उड़ाते हैं, आपके पड़ोसी आपके घर पर बैठने को लेकर तंज कसते हैं….यदि आपका ध्यान इन सब पर चला गया तो आप अपने लक्ष्य को पाने से चूक जायेंगे !

    आप सफल हो जायेंगे तो यही लोग आपको बधाई भी देंगे. दूसरों को कहते फिरेंगे कि देखिए मेरा भतीजा/भाँजा आईएएस/आईपीएस है. अन्दर ही अन्दर वे भले ही कुढ़ते रहें पर शान से आपकी तारीफ़ दूसरों के सामने करेंगे ताकि उनका स्टेटस भी ऊँचा हो. इसीलिए इन मामूली फैक्टर से अपने जीवन को नष्ट मत कीजिए. लोगों को कहते रहने दीजिए, मैं भी आप ही लोगों में से यूँही एक तरह से इसी तरह सुनता आया हूँ बेफिक्र रहिये बेवाक रहिये हमारी तरह !

    UPSC की परीक्षा कोई बैंकिंग या SSC की परीक्षा नहीं है. यह एक high-level परीक्षा है. इनके सवाल अच्छे-अच्छों की छुट्टी कर देते हैं. आपने लाख तैयारी की हो, 24 घंटे ही क्यों न पढ़ लिया हो, पर आप जनरल नॉलेज के 200 के 200 सवाल कभी सही नहीं कर सकते जैसा CAT या अन्य MBA परीक्षा में लोग कर लेते हैं. इसलिए आपकी मंजिल टेढ़ी-मेढ़ी है और न ही इसका कोई शोर्ट-कट है. हम अपनी मंजिल तभी पूरी कर पायेंगे जब हम स्वयं में यह दृढ़संकल्प करें कि हम किसी भी बाहरी नकारात्मक शक्तियों को अपने आस-पास भी नहीं फटकने देंगे और दिन -रात एक कर के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे !

    आईएएस की तैयारी के लिए एक साल पर्याप्त माना जाता है. वैसे ये विद्यार्थी के क्षमता पर निर्भर करता है. किसी के लिए 6 महिने की पढ़ाई भी काफी है और किसी के लिए 2 साल की पढ़ाई भी काफी नहीं. पर इसमें निराश होने की जरुरत नहीं. क्षमता को बढ़ाया और घटाया जा सकता है. आप ठान लें कि आज से और अभी से आप अगले साल तक रोजाना 6 घंटे की पढ़ाई करेंगे तो आप इस टेढ़े-मेढ़े सफ़र को सरलता से पार कर जायेंगे. पर ऐसा अक्सर होता नहीं. हर लोगों का मोटिवेशन लेवल अलग-अलग होता है और यही मोटिवेशन लेवल हार और जीत का फैसला करता है. आप हो सकता है आज यह आर्टिकल पढ़ कर कसम खा लें कि मैं रोजाना आईएएस की पढ़ाई के लिए अगले मेंस तक 6 घंटे दूंगा….और यह भी हो सकता है कि आप आज और कल तक अपने संकल्प पर कायम भी रहें….मगर तीसरे दिन आते-आते तक …कुछ ऐसा होगा कि आप फिर वापस वहीं पर चले जायेंगे जहाँ पहले थे. सब छूट जायेगा. किसी की गर्लफ्रेंड नाराज़ हो जाएगी, कभी व्हाट्सएप गुनगुनाने लगेगा, कभी पिताजी की डांट पड़ने से उदास हो जाओगे….कुछ न कुछ ऐसा हो ही जायेगा कि आप अपने लक्ष्य से भटक जाओगे !

    वहीं जिसका सफल होना लिखा है…वह अपने लक्ष्य पर डटा रहेगा. चाहे आँधी आए, चाहे तूफान….चाहे गर्लफ्रेंड ने बात करना बंद कर दिया, चाहे पापा की डांट ही क्यूँ न पड़ गयी हो..उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. वह दिन रात एक कर देगा. इन्टरनेट पर भी वही चीजें देखेगा जो उसकी काम की हों, जो उसे प्रोत्साहित करती हों…जो उसके नोट्स बनाने के काम आए या फिर कुछ उपयोगी बिषय वस्तु लगे अवगत रहें !

    मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं…! मेरी भी नहीं, यही सवाल प्रारंभ में मेरा भी था, लेकिन सवाल को करने से मुझे आजतक कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि नुकसान ही हुआ है ! कईओं का यही सवाल... उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं, लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वे कैसे आगे बढ़ें? हाँ. हमारे नसीब में हर कुछ नहीं होता. किसी के पास किताबें खरीदने के पैसे-ही-पैसे हैं….हज़ारों की किताबें वह खरीद सकता है मगर दुर्भाग्य है कि उन्हें पढ़ने का उसके पास समय ही नहीं. किन्हीं को एक किताब को खरीदने के लिए 100 बार सोचना पड़ता है. पुरानी किताबों को बेचकर उन्हें नयी किताबें लेनी पड़ती हैं. पर सोचिए, आपके पास सिर्फ पैसे नहीं हैं, किन्हीं-किन्हीं के पास लिखने के लिए हाथ भी नहीं है, किन्हीं की आँखें कमजोर हैं, उन्हें कुछ दिखता नहीं….!

    इसलिए पीड़ा की कोई सीमा नहीं है. आप गरीब हैं, अमीर हैं…फर्क तो पड़ता है. पर उतना नहीं जितना हम सोच लेते हैं. किताबें उधार भी ली जा सकती हैं, पुरानी किताबों को भी कम दामों में ख़रीदा जा सकता है….बस दिमाग में यह रहना चाहिए कि हमें रुकना नहीं है, चलते रहना है…चलते रहना है….जितना कठिन संघर्ष होगा उतनी ही शानदार जीत होगी. अपनी सोंच को संकुचित नहीं कीजिए. मेरे पास ये नहीं है, वो नहीं है से अच्छा है कि जो है उसका पूर्ण प्रयोग करना सीखें. छोटी सोच और पैर में पड़ी मोच से आगे कभी नहीं बढ़ा जा सकता !

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    क्या दिल्ली जाना जरुरी है? सबसे बड़ा सवाल !


    यूपीएससी परीक्षा में सफल होने के लिए दिल्ली जाने की आवश्यकता नहीं है. आप बेशक घर बैठे भी तैयारी कर सकते हैं. घर में बैठने से बहुत बार मन टूटता है. कभी चीनी ले आओ, कभी सब्जियाँ …पढ़ाई के बीच-बीच में आपको कई बार उठना पड़ता है. आप अन्दर से चिढ़ जाते हैं और यही चिढ़ आपमें नकारात्मकता लाता है जो आपके लक्ष्य के लिए खतरनाक है. घर के कुछ काम कर देने से आपका बहुत सारा समय बर्बाद नहीं होता, हद से हद 2 घंटे, वह भी रोज नहीं…कभी-कभी. मगर इसको लेकर स्वयं को स्ट्रेस मत दें…पॉजिटिव सोचें….आपको इस परीक्षा के लिए समाज के बारे में भी जानना है. याद कीजिए UPSC आपसे decision making से भी सवाल पूछती है. जैसे कि आप किसी दवाई की दुकान गए, आप गौर करते हैं कि दवाई वाले भैया ने आपको दवाई की खरीद पर रसीद नहीं दिया, कच्चा चिट्ठा दे कर पैसे ले लिए…तो ऐसे में आप क्या करेंगे? i) उसे इस बात से अवगत करायेंगे कि आपको रसीद देनी चाहिए और रसीद देने की माँग करेंगे ii) बगल के थाने में रिपोर्ट कर देंगे iii) उसे डरायेंगे-धमकाएंगे iv) चुप-चाप दवा ले कर घर लौट जायेंगे !

    इसलिए जब तक आप समाज को जानोगे नहीं, बाहर घूमोगे नहीं…तो इन सवालों का जवाब आप दोगे कैसे? इसलिए हर चीजों को पॉजिटिव वे में लें….आपको कोई डिस्टर्ब भी कर रहा है तो उसमें भी कोई पोसिटिवनेस  ढूँढिए. दिल्ली जाना तभी ठीक है, जब आपके पास पर्याप्त पैसे हों या आप घर में बैठ कर बिल्कुल पढ़ नहीं सकते या आपके अगल-बगल परिवार में कोई भी इस बैकग्राउंड  से न हो !

    मैं नया अप्रेन्टिस हूँ, शुरुआत कहाँ से करे ?.. बेहतर है पहले सिलेबस को ध्यान से देखिए. फिर पिछले साल आये सवालों को देखिए. उन पर रिसर्च कीजिए. यह भी एक अभ्यास है. धीरे-धीरे आप UPSC में पूछे जाने वाले सवालों के पैटर्न को अच्छी तरह समझने लगेंगे. आपको पता लग जायेगा कि UPSC डायरेक्ट सवाल नहीं पूछती ….जैसे- वर्तमान वित्त मंत्री कौन हैं, यह सब SSC लेवल के सवाल हैं. UPSC को पूछना होगा तो वह वित्त मंत्री के कार्यक्षेत्र क्या-क्या हैं…यह पूछेगी. इस तरह आप पैटर्न को समझेंगे. पैटर्न को जब आप समझ जायेंगे और फिर जा कर किताबों को पढ़ेगें तो आप पायेंगे कि आप किताब को अलग ढंग से पढ़ रहे हैं. आपको सिर्फ वही चीज उस किताब में दिखेगी जो आपके काम की हो. किताबों में वाक्यों पर पेंसिल से लाइन भी ड्रा करिए जो वाक्य आपको इम्पोर्टेन्ट लगे. Recommended किताबों के बारे में मैं पहले ही लिख चुका हूँ, यहाँ पढ़ें !

    UPSC में लेखन अभ्यास का क्या रोल है?


    आपको पढ़ने के साथ-साथ लिखने का भी अभ्यास करते रहना चाहिए क्योंकि लेखन के क्षेत्र में जब तक आपका हाँथ नहीं खुलेगा आप मेंस में अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाओगे. किसी भी टॉपिक को संक्षेप में (लगभग 200 शब्द) लिखने का रोज अभ्यास करें. यदि आपकी लेखन शैली को कोई जाँच करने वाला या व्याकरण चेक करने वाला हो तो सोने पर सुहागा है !



    मैं लगातार मिल रही विफलता से टूट चुका हूँ

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    विफलता मिलने से टूटना स्वभाविक है. विफलता परेशान ही करती है और अन्दर से विचलित भी. पर अब तो आपके पास attempts भी कई सारे हैं. जरुरी नहीं कि हर कोई पहली या दूसरी बार में ही सफलता प्राप्त कर ले क्योंकि हमारे जीवन में भाग्य का भी रोल होता है. आपने कई बार देखा होगा कि आपका दिन कभी-कभी जरुरत से ज्यादा अच्छा जाता है और जिस दिन कुछ खराब होना रहता है तो उस दिन सब कुछ लगातार खराब ही ख़राब होता है. हिम्मत मत हारिये. कभी-कभी गुच्छे की आखरी चाभी भी ताला खोल देती है इसलिए डटे रहिए !
    आलेख इन्टरनेट की दुनिया से लिया गया है
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    Monday, 17 December 2018

    Which type of crime can be settled with permission of court? in Hindi || न्यायालय की अनुमति से होने वाले समझौते

    December 17, 2018 0
    Which type of crime can be settled with permission of court? in Hindi || न्यायालय की अनुमति से होने वाले समझौते

    Which type of crime can be settled with permission of court?

    Which type of crime can be settled with permission of court?

    Which type of crime can be settled with permission of court?



    न्यायालय की अनुमति से होने वाले समझौते 

    1. इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 312

    किसी महिला का गर्भपात कराना: इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 312 के अंतर्गत किसी महिला का उसकी मर्जी के खिलाफ गर्भपात नहीं कराया जा सकता है, ऐसा करना दंडनीय अपराध है. यदि कोई पति/ सगा सम्बन्धी ऐसा करने का प्रयास करता है और पीड़ित महिला पुलिस में FIR करा देती है तो फिर इस मामले में कोर्ट की सहमती से ही दोनों पक्ष समझौता कर सकते हैं. ध्यान रहे कि ऐसे मामले में सिर्फ वही महिला समझौता कर सकती है जिसका गर्भपात कराने का प्रयास किया गया है या करा दिया गया है.


    2. इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 494

    दूसरी शादी करना: यदि कोई व्यक्ति/महिला अपनी जीवित पत्नी या पति के रहते किसी और स्त्री/ पुरुष से शादी करते है तो इस तरह का कृत्य इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 494 के अंतर्गत अपराध है. इस मामले में कोर्ट की सहमती से पूर्व पत्नी/पूर्व पत्नि ही समझौता कर सकते हैं. इसमें ये तीन लोग एक साथ रह सकते हैं इसका प्रावधान भी कानून में है.


    3. इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 509

    किसी महिला पर कमेंट करना/सीटी बजाना या कोई गलत इशारा करना: ये सभी काम जिनसे किसी महिला की मर्यादा को चोट पहुँचती है या महिला को कोई ऐसी चीज दिखाना जिससे कि उसकी मर्यादा भंग होती है तो इस तरह के काम इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 509 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आते हैं. ऐसे मामलों में सिर्फ वह महिला ही कोर्ट की सहमती से समझौता कर सकती है जिसके साथ यह घटना घटी होती है.


    4. इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 343

    किसी को 3 दिन पर बंधक बनाकर रखना: यदि कोई व्यक्ति किसी को उसकी इच्छा के बिना 3 दिनों तक बंधक बनाकर रखता है तो पीड़ित व्यक्ति इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 343 के अंतर्गत मामला दर्ज करा सकता है. यदि समझौता होता है तो कोर्ट की सहमती से सिर्फ पीड़ित व्यक्ति ही कर सकता है.

    5. IPC के धारा 428

    दस रुपये या ऊपर के मूल्य के जानवर को मरना या अपंग करना: यह अपराध पढ़ने में थोडा अजीब लग रहा है लेकिन यह सच है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दस रुपये या ऊपर के मूल्य के जानवर को मारता या अपंग करता है तो IPC के धारा 428 के तहत उसे सजा होगी और समझौता कोर्ट की सहमती से जानवर के मालिक द्वारा ही किया जा सकता है.

    6. IPC के सेक्शन 424

    धोखाधड़ी से किसी संपत्ति को छुपाना या हड़पना: यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी से किसी की संपत्ति को चुराता या हड़पता है तो ऐसा करना IPC के सेक्शन 424 के तहत अपराध है लेकिन यदि प्रभावित व्यक्ति इस मामले में समझौता करना चाहे तो कोर्ट को बताकर ऐसा कर सकता है.

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  • Is always essential to tender in evidence the F.I.R. ? : The answer is yes. It is the elementary duty of the Investigator and, the prosecution to tender in evidence the copy of the FIR Ouseph (1957 Cr. L. J. 1132) Kerala. When examining an informant, if the FIR is not tendered, the accused are denied the opportunity of cross examination on the FIR 1972 Cr. L. 451 (S.C.) Damodar Prasad and cannot be relied upon.